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अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एयर स्ट्राइक की

Nil dhankar
28 Jun 2026 7:36 AM IST
अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास एयर स्ट्राइक की
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अमेरिका। अमेरिका ने एक बार फिर ईरान में बड़ा हमला किया है. 24 घंटे के भीतर दूसरी बार अमेरिका ने शनिवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के मिलिट्री सर्विलांस इंफ्रस्ट्रक्टर, कम्युनिकेशन सिस्टम्स, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्र और समुद्री बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया.

ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने सैन्य सूत्र के हवाले से बताया कि दक्षिणी शहर सिरिक के पास विस्फोटों की आवाज सुनी गई. कई प्रोजेक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए, हालांकि घटना के बारे में तत्काल अधिक जानकारी नहीं दी गई. शुक्रवार को भी ईरान के भीतर अमेरिका ने जबर्दस्त अटैक किया था. हैरानी की बात यह है कि हाल ही में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी थी. ऐसे में अमेरिका की इस कार्रवाई से दोनों देशों के बीच तनातनी फिर बढ़ने लगी है.

अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने शनिवार तड़के वन-वे अटैक ड्रोन के जरिए पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया. CENTCOM के अनुसार, यह टैंकर दो मिलियन (20 लाख) से अधिक बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज के पास से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ. अमेरिकी सेना का कहना है कि शुक्रवार की कार्रवाई के बाद ईरान को युद्धविराम पालन करने का मौका दिया गया था, लेकिन उसने तनाव कम करने के बजाय ताजा हमला कर हालात को और गंभीर बना दिया.

CENTCOM ने अपने बयान में कहा, होर्मुज से कमर्शियल शिप्स की आवाजाही जारी है. अमेरिकी सेना पूरी तरह सतर्क, सक्षम और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है. अमेरिका सेना ने शुक्रवार को भी ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ रडार ठिकानों पर हमले किए थे. वॉशिंगटन का कहना था कि यह कार्रवाई 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी. तनाव बढ़ने के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी थी. उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा, 'ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और हमने उसका पालन किया. यदि समझौते को पालन करने में कोई मतभेद है, तो बातचीत से सुलझाया जा सकता है. लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा.'


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